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Black Box एक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग डिवाइस है जिसे विमानन दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच की सुविधा के लिए एक विमान में रखा जाता है।फ्लाइट रिकॉर्डर, ब्लैक बॉक्स, उपकरण जो उड़ान में एक विमान के प्रदर्शन और स्थिति को रिकॉर्ड करता है। दुर्घटनाओं या अन्य असामान्य घटनाओं के विश्लेषण को संभव बनाने के लिए सरकारी नियामक एजेंसियों को वाणिज्यिक विमानों पर इन उपकरणों की आवश्यकता होती है।
ब्लैक बॉक्स एक सामान्य शब्द है जिसका उपयोग आधुनिक वाणिज्यिक विमानों द्वारा किए गए कम्प्यूटरीकृत उड़ान डेटा रिकॉर्डर का वर्णन करने के लिए किया जाता है। फ़्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) एक छोटा कंप्यूटर सिस्टम है जो विमान की उड़ान के संबंध में विभिन्न प्रकार के डेटा को ट्रैक करता है, जैसे कि एयरस्पीड, स्थिति और ऊंचाई।
इस उपकरण का उपयोग आम तौर पर कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) के रूप में जाने जाने वाले दूसरे ब्लैक बॉक्स के संयोजन के रूप में किया जाता है, जो कॉकपिट में रेडियो प्रसारण और ध्वनियों को दस्तावेज करता है, जैसे पायलटों की आवाज और इंजन शोर। दुर्घटना की स्थिति में, इन ब्लैक बॉक्स में संग्रहीत जानकारी का उपयोग दुर्घटना के कारण का पता लगाने में किया जा सकता है।
1.FDR , 2.CVR
एफडीआर एक प्रकार से ब्लैक बॉक्स के अंदर डाटा रिकॉर्ड का काम करता है मतलब यह कि अगर किसी एयरक्राफ्ट की उड़ान के समय दुर्घटना हो जाती है। तो एफडीआर डिवाइस से इस बात का पता लगाया जा सकता है कि हादसे के वक्त एयरक्राफ्ट किस हालत में था। इसका काम एयरक्राफ्ट के सेंसर से डाटा रिकॉर्ड करना है एफडीआर से चौपर की स्पीड ऊंचाई और दूसरे अन्य टेक्निकल चीजों की भी जानकारी हासिल की जा सकती है|
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यदि कोई एयरक्राफ्ट किसी हादसे में क्रैश हो जाता है तो सीबीआर के द्वारा हम एयरक्राफ्ट के क्रैश होने की वजह को जान सकते हैं। किसी एयरक्राफ्ट के क्रैश होने या इसकी आशंका पर हादसे के लिए फ्लाइट डेट में ऑडियो इन्वायरमेंट को करने के लिए उपयोग किया जाता है। कॉकपिट मैं पायलटों के हेडसेट के माइक्रोफोन और एयरफोन के ऑडियो सिग्नल को सीबीआर रिकॉर्ड और स्टोर करता है
किसी कारण से ब्लैक बॉक्स का बना गया।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान। जब कोई फाइटर प्लेन क्रश होता या मार गिराया जाता था। तो उसकी जानकारी नहीं मिलती थी। ऐसे में ब्रिटिश आर्मी ने फाइटर जेट में एक डिवाइस ब्लैक बॉक्स लगाया इस डिवाइस में प्लेन की स्पीड और पायलटों की की आपसी बातचीत,ऊंचाई से स्पीड लोकेशन तक सभी जानकारी इस डिवाइस से मिलती है और यही कारण था कि ब्लैक बॉक्स को ब्रिटिश आर्मी ने बनाया।
ब्लैक बॉक्स को टाइटेनियम की धातु से बनाया जाता है इसके पीछे का कारण यह है। कि किसी भी दुर्घटना या क्रश के बाद भी इन ब्लैक बॉक्स सुरक्षित रहें इसके लिए इसे सबसे मजबूत धातु टाइटेनियम से बनाया जाता है इसके साथ ही इसके भीतर की दीवार को भी काफी मजबूत बनाया जाता है ताकि कभी दुर्घटना के होने पर भी ब्लैक बॉक्स सेफ रहे।
ब्लैक बॉक्स जिसका नाम सुनते ही अधिकतर लोग समझते हैं।कि यह काले कलर का होता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है ब्लैक बॉक्स के लिए काले रंग का इस्तेमाल नहीं किया किया जाता और यह नारंगी रंग का होता है l इसको नारंगी रंग से पेंट इसीलिए किया जाता है। ताकि विमान के क्रैश होने के बाद इसे आसानी से खोजा किया जा सके।
किसी भी एयरक्राफ्ट के पीछे का हिस्सा सबसे सुरक्षित माना जाता है और यही वजह है कि ब्लैक बॉक्स को एयरक्राफ्ट की तेलियानी इसके पीछे के हिस्से में फिट किया जाता है ब्लैक बॉक्स में फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर एफडीआर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर 2am हिस्से होते हैं एफडीआर में फ्लाइट का सारा डाटा होता है जैसे कि प्लेन किस तरह से मोड रहा है किस तरह वह नीचे आ रहा था उसकी स्पीड कितनी है। फ्यूल कितना था वह चाय कितने थे और इंजन पर कितना दबाव था इसके अलावा सीबीआर में को ट्विटर की गतिविधियां रिकॉर्ड होती है इसमें पायलट की बातचीत से लेकर एयर ट्रेफिक कंट्रोल एटीसी और केबिन क्रु की बातचीत भी रिकॉर्ड होती है।
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