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बहुत समय पहले की बात है। नर्मदा नदी के तट पर एक विशाल वृक्ष था। उस पर बड़ी संख्या में पक्षी बैठे थे। पेड़ इतना घना था कि भारी बारिश में भी घोसलो का कुछ भी खराब नहीं हो सकता था।
एक दिन भारी वर्षा हुई। वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी। बारिश के साथ हवाएं भी चलीं रही थी| तभी वहां बंदरों का झुंड आ गया। बंदर भीगे हुए और ठंडी हवाओ से कांप रहे थे।
घोसले में बैठे पक्षियों ने बंदरों की यह हालत देखी। तभी एक पंछी नीचे आया और बंदर से बोला, “तुम्हें हर बार बरसात के मौसम में इस तरह क्यों परेशान होना पड़ता है? हमको देखो, हमने खरबूजे और तिनके लाकर ही अपना घोसला बनाया है और आज हम बारिश में सुरक्षित हैं।
लेकिन भगवान ने आपको दो हाथ और दो पैर दिए हैं, जिनका इस्तेमाल आप इधर-उधर से कूदने और खेलने के लिए करते हैं। आप अपने लिए एक घर क्यों नहीं बनाते, जो बारिश और धूप में आपकी रक्षा कर सकता है |
यह सुनकर बंदर भड़क गया। उसे लगा कि यह पक्षी हमारे बारे में इस तरह कैसे बात कर रहा है। बंदरो को लगा कि ये पक्षी हमें मूर्ख समझ रहे हैं। “बारिश को रुकने दो, फिर हम उन्हें सबक सिखाएंगे। और फिर जैसे ही बारिश रुकी, सभी बंदर पेड़ पर चढ़ गए और घोसलो को नष्ट कर दिया। घोसलो में अंडे टूटे गए | अब घोसले पेड़ पर नहीं रहे। नतीजा यह हुआ कि पक्षियों ने इधर-उधर उड़कर अपनी जान बचाई।
इसलिए कहा जाता है कि सलाह हमेशा बुद्धिमानों को ही देनी चाहिए, और जब मांगा जाता है। Don’t give advice to fools।
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राष्ट्र भाषा – हिंदी | National Language Hindi
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धन्यवाद
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